ईडी का बड़ा प्रहार: सांसद अशोक कुमार मित्तल के कारोबारी साम्राज्य की जांच शुरू

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ईडी का बड़ा प्रहार: पंजाब में लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी समेत 9 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी, आप सांसद अशोक मित्तल के कारोबारी साम्राज्य की जांच शुरू

प्रवर्तन निदेशालय ने 15 अप्रैल 2026 को फेमा उल्लंघन के एक मामले में आप के राज्यसभा उपनेता डॉ. अशोक कुमार मित्तल के ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई उनकी पार्टी में नई जिम्मेदारी मिलने के महज दो सप्ताह बाद हुई, जिसने पंजाब की राजनीति में भूचाल ला दिया है।

जालंधर/चंडीगढ़। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बुधवार की सुबह पंजाब में एक बड़े और समन्वित तलाशी अभियान को अंजाम दिया। केंद्रीय जांच एजेंसी की टीमें सुबह करीब साढ़े सात बजे एक साथ नौ से अधिक स्थानों पर पहुंचीं और तलाशी शुरू की। इस पूरी कार्रवाई का केंद्र थे आम आदमी पार्टी (आप) के राज्यसभा सांसद और पार्टी के उपनेता डॉ. अशोक कुमार मित्तल — जो पंजाब के फगवाड़ा स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) के संस्थापक और कुलाधिपति हैं।

ईडी ने यह कार्रवाई विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (फेमा) के अंतर्गत चल रही जांच के तहत की है। हालांकि एजेंसी की ओर से अभी तक आधिकारिक बयान नहीं आया है, सूत्रों के अनुसार जांच का मुख्य केंद्र लवली ग्रुप से जुड़े कोष प्रवाह और विदेशी मुद्रा लेनदेन में कथित अनियमितताएं हैं।

सुबह का समन्वित अभियान — जालंधर से गुरुग्राम तक

ईडी की जालंधर और चंडीगढ़ इकाइयों ने मिलकर इस अभियान को अंजाम दिया। तलाशी के दायरे में जालंधर में डॉ. मित्तल का आवास, फगवाड़ा स्थित एलपीयू का विशाल परिसर, और गुरुग्राम (हरियाणा) में लवली ग्रुप के कारोबारी कार्यालय शामिल रहे। इसके अलावा मित्तल के पुत्र से जुड़े ठिकानों पर भी तलाशी की गई। उल्लेखनीय है कि इस पूरी कार्रवाई में स्थानीय पुलिस की कोई मदद नहीं ली गई — ईडी की टीमों ने स्वतंत्र रूप से अभियान चलाया।

तलाशी अभियान के दौरान डॉ. मित्तल स्वयं अपने जालंधर स्थित आवास पर मौजूद थे। सुरक्षाकर्मियों को उनके आवास के बाहर तैनात किया गया था। रिपोर्ट लिखे जाने तक ईडी की तलाशी जारी थी।

कौन हैं डॉ. अशोक कुमार मित्तल?

61 वर्षीय डॉ. अशोक कुमार मित्तल पेशे से कानून स्नातक और चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं। उनकी उद्यमशीलता की यात्रा काफी रोचक रही है — उन्होंने परिवार के मिठाई व्यापार से अपना करियर शुरू किया, फिर ऑटोमोबाइल क्षेत्र में कदम रखा और डीलरशिप नेटवर्क खड़ा किया। वर्ष 2001 में उन्होंने एक छोटे से शैक्षणिक संस्थान की नींव रखी, जो कालांतर में लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के रूप में भारत के सबसे बड़े निजी विश्वविद्यालयों में से एक बन गया। आज एलपीयू सैकड़ों एकड़ में फैला है और देश-विदेश के लाखों छात्रों का शैक्षिक केंद्र है।

डॉ. मित्तल 2022 में राज्यसभा सांसद बने। वे आप के सात राज्यसभा सदस्यों में से एक हैं और संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति के सदस्य भी हैं। लवली ग्रुप का संचालन वे अपने भाइयों रमेश मित्तल और नरेश मित्तल के साथ मिलकर करते हैं।

राघव चड्ढा की जगह मिली थी नई जिम्मेदारी — और फिर आया ईडी का नोटिस

इस कार्रवाई का राजनीतिक पहलू और भी अहम है। छापेमारी से महज दो सप्ताह पहले ही आप ने डॉ. मित्तल को राज्यसभा में पार्टी का उपनेता नियुक्त किया था। यह पद इससे पहले वरिष्ठ आप नेता राघव चड्ढा के पास था। नई जिम्मेदारी मिलते ही डॉ. मित्तल उच्च सदन में पार्टी के प्रमुख प्रवक्ता और रणनीतिक चेहरे के रूप में उभरे थे। ऐसे में इस पदोन्नति के तुरंत बाद ईडी की कार्रवाई ने राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया।

सियासी घमासान — आप का पलटवार, भाजपा का बचाव

“भाजपा ने पंजाब चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है। ईडी ने आप के राज्यसभा सांसद अशोक मित्तल के घर और यूनिवर्सिटी पर छापा मारा — यह मोदी जी का तरीका है। लेकिन हम वे पत्ते नहीं जो डाल से गिर जाएं।”

— भगवंत मान, मुख्यमंत्री, पंजाब

मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने इसे 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले केंद्रीय एजेंसियों के कथित दुरुपयोग का हिस्सा बताया। आप के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी मान की पोस्ट साझा करते हुए कहा कि पंजाब की जनता इसका मुंहतोड़ जवाब देगी। वहीं आप सांसद संजय सिंह ने भी आरोप लगाया कि जहां-जहां चुनाव होते हैं, भाजपा अपनी एजेंसियों का इस्तेमाल करती है।

दूसरी ओर भाजपा नेताओं ने ईडी की कार्रवाई का समर्थन करते हुए इसे कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बताया। उनका कहना है कि केंद्रीय एजेंसियां स्वतंत्र रूप से काम करती हैं और किसी राजनीतिक दबाव में नहीं आतीं।

यह पहली बार नहीं — आप नेताओं पर लगातार कसती जांच की नकेल

पंजाब में आप के कई नेता पहले से ईडी की रडार पर हैं। कुलवंत सिंह, संजीव अरोड़ा और जसवंत सिंह गज्जनमाजरा जैसे नेताओं पर भी 2023 के बाद से जांच एजेंसियों की नजर रही है। इसके अलावा 13 अप्रैल 2026 को राजनीतिक परामर्शदाता फर्म आई-पैक के निदेशक विनेश चंडेल को धन शोधन मामले में गिरफ्तार किया गया था। इस पूरे परिप्रेक्ष्य में एलपीयू पर ईडी की कार्रवाई एक बड़े राजनीतिक-न्यायिक परिदृश्य का हिस्सा नजर आती है।

निष्कर्ष

लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी पर ईडी की यह कार्रवाई केवल एक संस्थान तक सीमित नहीं है — यह 2027 के पंजाब चुनाव से पहले सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच बढ़ती तकरार का प्रतीक बन गई है। एक तरफ केंद्र सरकार इसे कानूनी जांच बता रही है, तो दूसरी तरफ आप इसे राजनीतिक प्रतिशोध करार दे रही है। जांच के नतीजे चाहे जो हों, इस घटनाक्रम ने पंजाब की राजनीतिक बिसात को और पेचीदा जरूर बना दिया है।

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