सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद की बेल रद्द करने वाली याचिका की समीक्षा खारिज कर दी
आज 20 अप्रैल 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने उमर खालिद की रिव्यू याचिका को ठुकरा दिया। ये याचिका जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा बेल देने से इनकार करने वाले फैसले की समीक्षा के लिए दाखिल की गई थी। अब सवाल ये उठता है – आखिर कोर्ट ने ऐसा क्यों किया? चलिए, पूरी कहानी सरल और रोचक तरीके से समझते हैं।
क्या था पूरा मामला?
फरवरी 2020 में दिल्ली के उत्तर-पूर्वी इलाकों में भयानक दंगे भड़के थे। CAA-NRC विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुए इन दंगों में 53 लोग मारे गए और 700 से ज्यादा घायल हुए।
पुलिस का आरोप है कि ये दंगे कोई सहज घटना नहीं थीं, बल्कि एक बड़ी साजिश का हिस्सा थे। उमर खालिद (पूर्व JNU छात्र और एक्टिविस्ट) पर आरोप है कि उन्होंने 24 और 25 फरवरी 2020 को (जब उस समय अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत दौरे पर थे) भड़काऊ भाषण दिए, जिन्होंने दंगों को भड़काने में मदद की।
उमर खालिद को 13 सितंबर 2020 को गिरफ्तार किया गया था। उन पर UAPA (गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम) और आईपीसी की कई धाराओं के तहत केस चल रहा है।
सुप्रीम कोर्ट का फैसला
जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट की बेंच (जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एन.वी. अंजारिया) ने उमर खालिद और शरजील इमाम की बेल याचिकाएं खारिज कर दी थीं।
कोर्ट ने कहा था कि दोनों आरोपियों की भूमिका “केंद्रीय और रणनीतिक” स्तर की है। वे साजिश की योजना बनाने, लोगों को जुटाने और दिशा देने में शामिल थे। इसलिए UAPA की सख्त धारा 43D(5) लागू होती है, जिसके तहत आसानी से बेल नहीं मिल सकती।
दिलचस्प बात ये है कि उसी फैसले में कोर्ट ने पांच अन्य आरोपियों — गुलफिशा फातिमा, मीरा हायder, शिफा उर रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद — को बेल दे दी थी। कोर्ट ने साफ कहा कि सभी आरोपी एक जैसे नहीं हैं। उमर खालिद और शरजील इमाम की भूमिका दूसरों से ज्यादा गंभीर है।
रिव्यू याचिका क्या हुआ?
उमर खालिद ने जनवरी के फैसले की समीक्षा के लिए रिव्यू पिटीशन दाखिल की। सीनियर वकील कपिल सिब्बल ने 13 अप्रैल को इस याचिका का जिक्र करते हुए ओपन कोर्ट में सुनवाई की मांग की थी।
लेकिन 16 अप्रैल 2026 को जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की बेंच ने कहा: “रिव्यू पिटीशन और संलग्न दस्तावेजों को देखने के बाद हमें जनवरी 5, 2026 के फैसले को समीक्षा करने का कोई पर्याप्त आधार या कारण नहीं मिला। इसलिए रिव्यू पिटीशन खारिज की जाती है।”
कोर्ट ने ओपन कोर्ट सुनवाई की मांग भी ठुकरा दी। रिव्यू पिटीशन आमतौर पर चैंबर में (बिना वकीलों की बहस के) सुनवाई होती है।
अभी उमर खालिद की स्थिति क्या है?
उमर खालिद अभी भी जेल में हैं। उनकी बेल की सारी कानूनी राहें (ट्रायल कोर्ट, हाईकोर्ट और अब सुप्रीम कोर्ट की रिव्यू) बंद हो चुकी हैं।
दोस्तों, ये मामला काफी संवेदनशील और लंबा चल रहा है। एक तरफ UAPA की सख्ती, दूसरी तरफ आरोपी की लंबी जेल अवधि – दोनों मुद्दे हमेशा चर्चा में रहते हैं।
अब आगे क्या होगा? ट्रायल कोर्ट में मुख्य मुकदमे की सुनवाई जारी रहेगी। उमर खालिद के पास अब और ज्यादा विकल्प नहीं बचे हैं, सिवाय ट्रायल पूरा होने का इंतजार करने के।
मामला जटिल है, इसलिए कोर्ट हर फैसले में सावधानी बरत रहा है। हम इस पूरे मामले पर नजर बनाए रखेंगे और जैसे ही कोई नई अपडेट आएगी, आपको बताएंगे।
आप क्या सोचते हैं इस फैसले के बारे में? कमेंट में जरूर बताएं।

