चंडीगढ़, 16 अप्रैल। खड़ूर साहिब से सांसद और ‘वारिस पंजाब दे’ संगठन के प्रमुख अमृतपाल सिंह को गुरुवार को पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय से बड़ा झटका लगा। अदालत ने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत उनकी तीसरी निवारक नज़रबंदी को चुनौती देने वाली याचिका को सिरे से खारिज कर दिया। यह फैसला उस व्यक्ति के लिए एक और कानूनी बाधा बन गया है, जो अप्रैल 2023 से लगातार जेल में बंद है।
क्या कहा हाईकोर्ट ने?
मुख्य न्यायाधीश शील नागू की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने खुली अदालत में फैसला सुनाते हुए स्पष्ट कहा कि अमृतपाल सिंह के विरुद्ध जारी निवारक नज़रबंदी आदेश न्यायिक समीक्षा की सीमा से पूरी तरह बाहर है और इसमें हस्तक्षेप की कोई गुंजाइश नहीं है। अदालत ने इसे इतना साफ और स्पष्ट मामला बताया कि किसी संदेह की कोई जगह ही नहीं छोड़ी। इसी के साथ याचिका निरस्त कर दी गई।
अमृतपाल की दलीलें
अमृतपाल सिंह ने अपनी याचिका में तर्क दिया था कि उनकी नज़रबंदी मनमानी, अधिकार-क्षेत्र से बाहर और संविधान के अनुच्छेद 21 व 22 के तहत मिले मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। उनके अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि अप्रैल 2023 से लगातार हिरासत में रखे जाने के बावजूद उनके खिलाफ ऐसा कोई ठोस साक्ष्य सामने नहीं आया, जो इस दीर्घकालिक कैद को न्यायसंगत ठहरा सके।
याचिका में यह भी उल्लेख किया गया था कि नज़रबंदी से पूर्व अमृतपाल सिंह युवाओं में नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाने, सामाजिक सुधार अभियानों और सामुदायिक गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल थे। उनके भाषणों को सिख मूल्यों, सांस्कृतिक पहचान और संवैधानिक अधिकारों तक सीमित बताया गया, न कि अलगाववाद या हिंसा से जुड़ा।
अमृतपाल पक्ष का एक महत्वपूर्ण तर्क यह था कि केवल आपराधिक मामलों की मौजूदगी के आधार पर निवारक हिरासत नहीं दी जा सकती, खासकर तब जब संबंधित मुकदमे पहले से सक्षम अदालतों में विचाराधीन हों। तीसरी नज़रबंदी के बारे में यह दावा किया गया कि यह केवल 10 अक्टूबर 2024 को दर्ज एक FIR पर आधारित है, जिसमें उनका नाम शुरुआत में था ही नहीं और बाद में 18 अक्टूबर 2024 की DDR के जरिए जोड़ा गया। याचिका के अनुसार धारा 173 CrPC के तहत दाखिल अंतिम रिपोर्ट में भी उनके खिलाफ एक भी साक्ष्य नहीं था।
राज्य सरकार का पक्ष
राज्य की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनुपम गुप्ता ने अदालत को बताया कि नज़रबंदी के मुख्य आधार दो हैं — पहला, एक 15 सदस्यीय ‘हिट लिस्ट’ का अस्तित्व, और दूसरा, अमृतपाल का घोषित आतंकवादियों व गैंगस्टरों से कथित घनिष्ठ संबंध। सरकार ने तर्क दिया कि इस हिट लिस्ट से उत्पन्न खतरे की गंभीरता और उसकी व्यापकता को देखते हुए NSA के अंतर्गत नज़रबंदी पूर्णतः उचित है। केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सत्य पाल जैन और अधिवक्ता धीरज जैन उपस्थित रहे।
पृष्ठभूमि
अमृतपाल सिंह अप्रैल 2023 से NSA के तहत असम के दिब्रूगढ़ केंद्रीय कारागार में बंद हैं। जून 2024 में वे खड़ूर साहिब लोकसभा सीट से सांसद चुने गए, लेकिन जेल में होने के कारण संसद में उपस्थित नहीं हो सके। यह उनके विरुद्ध जारी तीसरा निवारक नज़रबंदी आदेश है, जिसे चुनौती देने की यह याचिका भी अब खारिज हो चुकी है।
निष्कर्ष
पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के इस फैसले ने अमृतपाल सिंह की रिहाई की संभावनाओं को एक बार फिर धुंधला कर दिया है। एक ओर उनके समर्थक इसे न्याय की हार बता रहे हैं, तो दूसरी ओर सरकार का मानना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में न्यायिक हस्तक्षेप की सीमाएं होती हैं। अब देखना यह होगा कि अमृतपाल पक्ष इस निर्णय को उच्चतम न्यायालय में चुनौती देता है या नहीं।

