आज अंबेडकर जयंती पर साझा करें उनके ये 10 प्रेरणादायक विचार, बदल देंगे आपकी जिंदगी

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आज भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की 136वीं जयंती है। इस खास मौके पर हमें उनके महान और प्रेरणादायक विचारों को हर व्यक्ति तक पहुंचाना चाहिए।

डॉ. भीमराव अंबेडकर, जिन्हें भारतीय संविधान का निर्माता माना जाता है, का जन्म 14 अप्रैल 1891 को मध्य प्रदेश के महू में एक दलित परिवार में हुआ था। उन्होंने अपना जीवन दलितों, शोषितों और पिछड़े वर्ग के अधिकारों के लिए संघर्ष करते हुए बिताया। वे हमेशा समानता और अधिकारों की रक्षा के लिए लड़े, साथ ही मजदूर वर्ग और महिलाओं के हक के लिए भी आवाज उठाई। अंबेडकर न केवल एक महान चिंतक और समाज सुधारक थे, बल्कि एक न्यायविद और अर्थशास्त्री भी थे।

उनके विचार केवल उपनिवेशवाद के उन्मूलन तक सीमित नहीं थे, बल्कि वे प्रत्येक व्यक्ति के लिए स्वतंत्रता के पक्षधर थे। उनके लिए, समानता के बिना स्वतंत्रता और स्वतंत्रता के बिना समानता का अर्थ निरंकुश तानाशाही था।

इस अवसर पर आइए उनके कुछ विचारों को जानें:

1. “धर्म मनुष्य के लिए है, न कि मनुष्य धर्म के लिए। मैं ऐसे धर्म का अनुयायी हूं जो स्वतंत्रता, समानता और भाईचारा सिखाता है।”

2. “जीवन लंबा होने के बजाय महान होना चाहिए।”

3. “मैं किसी समाज की प्रगति को उसकी महिलाओं की प्रगति से मापता हूं।”

4. “यदि हम एक एकीकृत आधुनिक भारत चाहते हैं, तो सभी धर्मों के शास्त्रों की संप्रभुता का अंत होना चाहिए।”

5. “हिंदू धर्म में विवेक, कारण और स्वतंत्र सोच के विकास के लिए कोई जगह नहीं है।”

6. “इतिहास बताता है कि जहां नैतिकता और अर्थशास्त्र के बीच संघर्ष होता है, वहां जीत हमेशा अर्थशास्त्र की होती है।”

7. “बुद्धि का विकास मानव के अस्तित्व का अंतिम लक्ष्य होना चाहिए। जो लोग इतिहास को भूल जाते हैं, वे इतिहास नहीं बना सकते।”

8. “समानता एक कल्पना हो सकती है, लेकिन इसे एक गवर्निंग सिद्धांत के रूप में स्वीकार करना होगा।”

9. “यदि मुझे लगे कि संविधान का दुरुपयोग हो रहा है, तो मैं इसे सबसे पहले जलाऊंगा।”

10. “जब तक आप सामाजिक स्वतंत्रता नहीं प्राप्त कर लेते, कानून द्वारा दी गई स्वतंत्रता आपके लिए बेकार है।”

इस जयंती पर, राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने देशवासियों को शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने कहा है, “भारतीय संविधान के निर्माता और महान समाज सुधारक, बाबासाहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती के अवसर पर, मैं उन्हें सादर नमन करती हूं। उन्होंने अपना जीवन समाज के वंचित और कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए समर्पित किया।”

इस दिन हम सबको अंबेडकर के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने और एक न्यायपूर्ण, समावेशी और प्रगतिशील भारत के निर्माण का संकल्प लेना चाहिए।

 

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