इस्लामाबाद: अमेरिका-ईरान शांति वार्ता 21 घंटे चली, लेकिन कोई समझौता नहीं

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इस्लामाबाद: अमेरिका-ईरान शांति वार्ता 21 घंटे चली, लेकिन कोई समझौता नहीं; पाकिस्तान की मध्यस्थता बरकरार, सीजफायर पर जोर

इस्लामाबाद, 12 अप्रैल 2026 – पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच इतिहास में पहली बार आमने-सामने उच्चस्तरीय शांति वार्ता का पहला दौर रविवार सुबह समाप्त हो गया। उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस के नेतृत्व वाली अमेरिकी टीम ने 21 घंटे से अधिक चली मैराथन बैठक के बाद घोषणा की कि दोनों पक्षों के बीच कोई समझौता नहीं हो सका। ईरान ने अमेरिका की मुख्य मांग—परमाणु हथियार न विकसित करने की प्रतिबद्धता—को स्वीकार नहीं किया।

पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुई यह वार्ता मध्य पूर्व में छह सप्ताह से चल रही जंग को समाप्त करने का सबसे बड़ा कूटनीतिक प्रयास था। दोनों देशों के बीच दशकों बाद यह प्रत्यक्ष बातचीत थी, जिसकी मेजबानी पाकिस्तान ने की।

वार्ता की पृष्ठभूमि

फरवरी 2026 में अमेरिका और इजराइल के संयुक्त हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद मध्य पूर्व में तनाव चरम पर पहुंच गया था। इस संघर्ष में हजारों लोग मारे गए, लेबनान में हमले जारी रहे और विश्व की सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग—होर्मुज की खाड़ी—प्रभावित हुई, जिससे वैश्विक ऊर्जा कीमतें आसमान छू गईं।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार तथा फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की सक्रिय कूटनीति से दोनों पक्षों के बीच दो सप्ताह का नाजुक सीजफायर हुआ। पाकिस्तान ने इस्लामाबाद को वार्ता स्थल के रूप में प्रस्तावित किया और दोनों देशों को आमंत्रित किया। पाकिस्तानी अधिकारियों ने इसे “दोनों पक्षों पर भरोसा” का नतीजा बताया।

वार्ता में कौन शामिल था?

  • अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल: उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस (नेता), राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकोफ और ट्रंप के दामाद जared कुश्नर।
  • ईरानी प्रतिनिधिमंडल: विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद स्पीकर मोहम्मद बागेर ग़ालिबाफ।
  • मेजबान: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और अन्य वरिष्ठ अधिकारी।

वार्ता जिन्नाह कन्वेंशन सेंटर में हुई। सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और इस्लामाबाद में दो दिन की छुट्टी घोषित की गई थी।

क्या हुआ 21 घंटे की बैठक में?

शनिवार शाम शुरू हुई बातचीत रातभर चली और रविवार सुबह तक पहुंच गई। दोनों पक्ष आमने-सामने बैठे। डिनर ब्रेक के बाद लिखित प्रस्तावों का आदान-प्रदान हुआ। अमेरिका ने “अंतिम और सर्वश्रेष्ठ प्रस्ताव” रखा, जिसमें ईरान से परमाणु कार्यक्रम रोकने, यूरेनियम संवर्धन बंद करने और क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करने की मांग की गई।

जे.डी. वेंस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “बुरी खबर यह है कि हम कोई समझौता नहीं कर सके। ईरान ने हमारे शर्तों को स्वीकार नहीं किया। हमने अच्छे विश्वास के साथ बातचीत की, लेकिन वे परमाणु हथियार न बनाने की प्रतिबद्धता देने को तैयार नहीं हुए।”

ईरानी विदेश मंत्रालय ने इसे “गहन चर्चा” बताया और अमेरिका पर “अत्यधिक मांगें” और “अवैध शर्तें” थोपने का आरोप लगाया। ईरानी मीडिया ने दावा किया कि अमेरिका वार्ता से हटने का बहाना ढूंढ रहा था।

पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने दोनों पक्षों से सीजफायर बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा, “यह जरूरी है कि दोनों देश अपने सीजफायर के वादे पर कायम रहें। पाकिस्तान आगे भी संवाद की सुविधा प्रदान करेगा।”

आगे क्या?

वार्ता विफल होने के बावजूद पाकिस्तानी अधिकारियों ने आशा जताई है कि तकनीकी स्तर पर कुछ चर्चाएं जारी रह सकती हैं। दोनों पक्षों ने सीजफायर को बनाए रखने का वादा किया है, लेकिन स्थायी शांति समझौते के लिए अभी रास्ता लंबा है।

विश्लेषकों का मानना है कि मुख्य अड़चनें ईरान का परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय प्रभाव और इजराइल के साथ तनाव हैं। अमेरिका ने स्पष्ट किया कि ट्रंप प्रशासन की “स्पष्ट गाइडलाइंस” के तहत वार्ता हुई थी।

पाकिस्तान की भूमिका को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहा जा रहा है। इस्लामाबाद ने साबित किया कि वह दोनों महाशक्तियों के बीच विश्वसनीय मध्यस्थ बन सकता है।

क्षेत्रीय प्रभाव

वार्ता विफल होने से मध्य पूर्व में अनिश्चितता बनी हुई है। होर्मुज की खाड़ी में अमेरिकी नौसेना सक्रिय है और तेल आपूर्ति पर नजर रखी जा रही है। वैश्विक बाजारों में ऊर्जा कीमतें अभी भी अस्थिर हैं।

पाकिस्तानी सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे शांति प्रयासों का समर्थन करें। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा था, “हम आशा करते हैं कि इस्लामाबाद वार्ता स्थायी शांति लाएगी।”

यह वार्ता दशकों पुरानी अमेरिका-ईरान शत्रुता के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय साबित हुई, भले ही परिणाम अभी निराशाजनक रहा हो। आगे की बैठकें कब होंगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन पाकिस्तान दोनों पक्षों से संपर्क बनाए हुए है।

अपडेट: वेंस ने वार्ता समाप्त होने के तुरंत बाद पाकिस्तान से रवाना हो गए। दोनों देशों के तकनीकी अधिकारियों के बीच कुछ बैठकें जारी रह सकती हैं।

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